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raj narayan bohare ki kahani

कहानी                   विस्फोट                         -राजनारायण बोहरे                                 पुलिस व्हेन  फिर आकर मोहल्ले में रुकी है । इस बार जाने किसकी शामत आई है ? पिछले पांच दिनों से यही क्रम जारी है । हर दिन यह व्हेन आती हेै और मोहल्ले मंे से किसी एक को पकड़ ले जाती है । किसी पर जुर्म है कि वह काकाजी के खेत में आग लगाने का षडयंत्र कर रहा था , किसी पर यह इल्जाम है कि वह उन लोगों में था जिननेे तीन दिन पहले गांव की पुलिया पर बैलगाड़ी लूटी ।                            ...

कहानी निगरानी

कहानी- निग़रानी राजनारायण बोहरे चपरासी पंछी राम बड़ा तुर्रम खाँ है । पूरे पैंतीस बरस से वह कलेक्टर के हाथ के नीचे काम कर रहा है, सो बड़े -बड़े हाकिम-हुक्कामों से बोलने बतियाने और उनकी सेवा करने का अच्छा तज़ुर्बा है उसके पास । इस हुनर और तज़ुर्बे के दम पर अपने साथी चपरासियों के साथ बैठकर वह खूब लंबी लंबी गप्पें मारता है । बाकी लोग, चुप बैठ कर उसकी बातें मुंह बाये सुनते रहते हैं और उसकी हाँ में हाँ मिलाते हैं ।लेकिन इस दफा पंछीराम ऐसा फंसा कि सारी चौकड़ी भूल गया । दरअसल हुआ कुछ ऐसा , कि उन दिनों चारों ओर घनघोर बदरा छाये थे । सावन का महीना था । पूरे देश में झमाझम बरसात हो रही थी । छोटे-साधनहीन और दूर के इलाके में बसे गाँवों की कौन कहे, खूब ठीकठाक कस्बों और ख़ासे बड़े, तरक्की पा गये गाँवों तक पहुंचने के रास्ते गोबर और कीचड़ की गहरी लम्बी नदियों में तब्दील हो चुके थे । ऐसे बसकारे के टप्प-टप्प मौसम में दिल्ली बैठे एक आला हुक्काम ने हुकुम दागा कि अगले माह देश में आम-चुनाव कराये जायेंगे । जिस दिन अखबारों में यह खबर छपी, देश भर के प्राइमरी स्कूलों के मास्टर, तमाम दफ्तरों के बाबू...